Earthing Systems

हर घर ,भवन में वैद्युतिक वायरिंग को लगाने के अन्तर्गत ‘ अर्थ ‘ भी करना बहुत जरूरी है। क्योंकि किसी वैद्युतिक सर्किट के शॉर्ट होने पर वोल्टेज की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, जिससे आग लगने का खतरा रहता है।

इसीलिए अर्थिग वह प्रक्रम है , जिसमें किसी वैद्युतिक परिपथ के शॉर्ट हो जाने पर उसमें से बहने होने वाली शॉर्ट – सर्किट धारा को एक इलेक्ट्रॉड के द्वारा ही भूमि ( earth ) में प्रवाहित किया जाता है।
इस प्रकार देखा जाये तो अर्थ ( इलेक्ट्रॉड ) वह साधन है जो विद्युत से चलने वाली  मशीन / उपकरण आदि में फेज तार के धात्विक कवर से स्पर्श कर जाने की स्थिति से मनुष्य को विद्युत के झटके से बचाता है। भूमि के विभव का मान भी शून्य होता है।

अत अर्थ ( इलेक्ट्रॉड ) तार के द्वारा भूमि के शून्य विभव से किसी भी वैद्युतिक उपकरण / मशीन को जोड़ा जाता है , जिससे उपकरण की लीकेज धारा पृथ्वी में चली जाती है और वैद्युतिक दुर्घटना से बचाव होता है।
इस प्रकार अर्थिग , मनुष्य के जीवन , भवन एवं मशीनों की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है।

अर्थिंग का महत्व Importance of Earthing

अर्थिंग मुख्य रूप से मनुष्यों एवं जानवरों को विद्युत आघात से बचाने तथा इस आघात को न्यूनतम करने का एक उपाय है।

वैद्युतिक वायरिंग करते समय एक न भाग को उचित प्रकार से अर्थ करने का कारण , अर्थ लीकेज धारा को निम्न प्रतिरोध विसर्जन पथ प्रदान करना होता है।

वैद्युतिक अर्थ की अनुपस्थिति में सुध अथवा जानवर द्वारा इस धातु भाग पर स्पर्श करना प्राण घातक हो सकता है। मैतिक शॉक उस समय खतरनाक होता है , जब शरीर से प्रवाहित धारा एक निश्चित मिली ऐम्पियर धारा से अधिक हो जाती है।

सामान्यत हमारे शरीर में 50mA से अधिक धारा का प्रवाह बहुत खतरनाक होता है। अगर उपकरण को अर्थ किया जाएगा तो करंट तेजी से पृथ्वी में चली जाएगी और विद्युत लाइन जो है ओवरलोड हो जाएगी  जिससे उपकरण में अधिक धारा गमन होगी व MCB ट्रिप ( अपने से गिर जाती है या फ्यूज उड़ जाएगा।

इस प्रकार से अर्थ के  द्वारा मनुष्य के जीवन की सुरक्षा की जा सकती है तथा किसी भी प्रकार की अनावश्यक हानि या क्षति से बचा जा सकता है।

1. प्लेट अर्थिंग Plate Earthing :- 

अर्थिग की यह विधि नमी वाले स्थानों के लिए अधिक उपयुक्त है। इसमें लगभग 90 सेमी x 90 सेमी आकार का गड्ढा भूतल से 1.5 से 3 मी गहराई तक ( नमी प्राप्त होने तक ) खोदा जाता है।
इस गड्ढे में अर्थिग प्लेट को ऊर्ध्व स्थिति में स्थापित कर उसे अर्थिग तार से नट – बोल्ट के द्वारा जोड़ दिया जाता है। अर्थिग प्लेट के चारों ओर नमक एवं चारकोल की एकान्तर परतें 15 सेमी मोटाई तक लगाई जाती हैं।

गड्ढे में जल डालने के लिए एक पाइप लगाकर उसे मिट्टी से भर दिया जाता है। गड्ढे के ऊपरी सिरे पर जल – पाइप को एक फनल से जोड़ दिया जाता है।

उसके चारों ओर लगभग 30 सेमी x 30 सेमी सीमेन्ट बॉक्स बनाकर , कास्ट आयरन के ढक्कन से ढक दिया जाता है और ‘ अर्थ ‘ उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।

2. पाइप अर्थिंग Pipe Earthing :- 

अर्थिग की यह विधि सभी प्रकार के स्थानों पर प्रयोग की जा सकती है।
इसमें लगभग 30 सेमी x 30 सेमी आकार का गड्ढा , भूतल से 2.5 से 4.0 मी गहराई तक खोदा जाता है। इस गड्ढे में अर्थिग तार लपेटकर जी.आई. वाशर तथा सॉकेट से कस दिया जाता है।

अर्थिग पाइप के चारों ओर 15 सेमी चौड़ाई में नमक के डले तथा चारकोल चूर्ण की परतें जमा दी जाती हैं।

गड्ढे में जल डालने के लिए पाइप तथा फनल लगाकर गड्ढे को मिट्टी से भर दिया जाता है और फनल के चारों ओर लगभग 30 सेमी x 30 सेमी आकार का सीमेन्ट – कंक्रीट बॉक्स बनाकर कास्ट आयरन के ढक्कन से ढक दिया जाता है। इस प्रकार निर्मित ‘ अर्थ ‘ उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।

3. वाटर टैप अर्थिंग Water Tap Earthing  हैण्ड पम्प का पाइप भूमि के अन्दर काफी गहराई तक गड़ा होता है। इसके आस – पास की जगह में नमी बनी रहती है।

इस कारण यह ‘ अर्थ ‘ का कार्य भली प्रकार से कर पाता है। पाइप के ऊपर अर्थिग तार को कसकर बाँध दिया जाता है या सोल्डर कर दिया जाता है।

अर्थिंग तार की माप प्रत्येक 50 ऐम्पियर लोड के लिए या इसके किसी भाग के लिए 8 मिमी x 25 मिमी की ताँबे की पट्टी की होनी चाहिए

4. रॉड अर्थिंग Rod Earthing :- यह विधि सस्ती होती है तथा इसमें समय भी बहुत कम लगता है। इस विधि के अन्तर्गत ताँबे या जस्ते की ठोस रॉड को भूमि में दबाया जाता है।

और 12-20 मिमी व्यास की कई रॉड होती हैं , जिसमें से एक रॉड नीचे से नुकीली होती है , उसे ही काफी गहराई तक जमीन में गाड़ा जाता है। यह रॉड जितनी गहराई तक गाड़ी जाएगी उतना ही ‘ अर्थ ‘ प्रतिरोध कम होगा। इसके ऊपर से ही ‘ अर्थ ‘ तार क्लैम्प द्वारा बाँधा जाता है।